‘उल्लास बाल पर्व’ वर्ष 1993 से निरंतर आयोजित किया जा रहा एक प्रतिष्ठित बाल रंगमंच उत्सव है। यह पर्व रंगमंडल के संस्थापक–निदेशक श्री जितेन्द्र मित्तल द्वारा बच्चों के सर्वांगीण व्यक्तित्व विकास और रचनात्मक क्षमता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से प्रारंभ किया गया था। उनके इस प्रयास का मुख्य उद्देश्य न केवल बच्चों में अभिनय और रंगमंच के प्रति रुचि विकसित करना था, बल्कि उन्हें आत्मविश्वास, नेतृत्व और सामूहिक सहयोग की महत्वपूर्ण कौशलों से भी परिचित कराना था।
यह पर्व बच्चों के लिए एक ऐसा मंच प्रदान करता है जहाँ वे रचनात्मक अभिव्यक्ति, सामूहिक कार्य, और अभिनय कौशल के माध्यम से अपनी क्षमताओं को निखार सकते हैं। यह आयोजन न केवल उनकी व्यक्तिगत प्रतिभा को विकसित करता है, बल्कि उन्हें सामाजिक और सांस्कृतिक जागरूकता से भी अवगत कराता है। बच्चों के लिए यह पर्व केवल एक मनोरंजन का साधन नहीं है, बल्कि उनके मनोवैज्ञानिक और बौद्धिक विकास का भी एक सशक्त माध्यम है।
वर्षों से, उल्लास बाल पर्व ने बाल रंगमंच के क्षेत्र में एक विशेष पहचान बनाई है और यह पूरे देश के बच्चों और उनके अभिभावकों के बीच अत्यंत सम्मानित एवं लोकप्रिय उत्सव के रूप में जाना जाता है। इस उत्सव के माध्यम से कई युवा कलाकारों ने अपने अभिनय कौशल को पहचान और मंच उपलब्धि प्राप्त की है, जिससे उन्हें आगे की रंगमंच यात्रा में मार्गदर्शन मिला।

उल्लास बाल पर्व के अंतर्गत प्रस्तुत महत्वपूर्ण नाटक:
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