वतन के वास्ते
लेखक: डॉ. छवि मिश्रा
“वतन के वास्ते” एक अत्यंत लोकप्रिय और दर्शकों के दिलों में बसने वाला नृत्य-नाटक है, जिसे डॉ. छवि मिश्रा ने लिखा है और पुनीत मित्तल ने निर्देशित किया है। यह नाटक एक सैनिक के जीवन, उसके संघर्षों और उसके त्याग की हृदयस्पर्शी कहानी प्रस्तुत करता है।
वह देश की रक्षा के लिए अपने परिवार, अपने बच्चे और अपने सुखों को पीछे छोड़कर सीमाओं पर निरंतर ख़तरे के बीच जीवन बिताता है और भारत माता के लिए अंतिम बलिदान देने में भी एक क्षण की देरी नहीं करता।
नाटक यह भी दर्शाता है कि किस प्रकार एक सैनिक देश के प्रति जीवनभर समर्पण की शपथ लेता है, और वही देशभक्ति की भावना उसकी अगली पीढ़ी, उसके पुत्र, में भी प्रवाहित होती है। साथ ही यह उस पत्नी के सच्चे प्रेम और साहस को उजागर करता है, जो अपने पति के बलिदान को सम्मानपूर्वक स्वीकार कर अपने बेटे के साथ निर्भय होकर जीवन का नया अध्याय प्रारम्भ करती है।
इस भावप्रधान प्रस्तुति में प्रेम, वेदना और आक्रोश के विविध रंग समाहित हैं, जिन्हें मूवमेंट, कथक, भरतनाट्यम तथा कॉन्टेम्परेरी डांस के सुंदर संयोजन के माध्यम से प्रभावशाली रूप में प्रस्तुत किया गया है।
यह नाटक उन सभी शहीद सैनिकों को श्रद्धांजलि अर्पित करता है, जिन्होंने हमारे लिए अपना सर्वस्व न्यौछावर कर दिया।
“वतन के वास्ते” एक अत्यंत लोकप्रिय और दर्शकों के दिलों में बसने वाला नृत्य-नाटक है, जिसे डॉ. छवि मिश्रा ने लिखा है और पुनीत मित्तल ने निर्देशित किया है। यह नाटक एक सैनिक के जीवन, उसके संघर्षों और उसके त्याग की हृदयस्पर्शी कहानी प्रस्तुत करता है।
वह देश की रक्षा के लिए अपने परिवार, अपने बच्चे और अपने सुखों को पीछे छोड़कर सीमाओं पर निरंतर ख़तरे के बीच जीवन बिताता है और भारत माता के लिए अंतिम बलिदान देने में भी एक क्षण की देरी नहीं करता।
नाटक यह भी दर्शाता है कि किस प्रकार एक सैनिक देश के प्रति जीवनभर समर्पण की शपथ लेता है, और वही देशभक्ति की भावना उसकी अगली पीढ़ी, उसके पुत्र, में भी प्रवाहित होती है। साथ ही यह उस पत्नी के सच्चे प्रेम और साहस को उजागर करता है, जो अपने पति के बलिदान को सम्मानपूर्वक स्वीकार कर अपने बेटे के साथ निर्भय होकर जीवन का नया अध्याय प्रारम्भ करती है।
इस भावप्रधान प्रस्तुति में प्रेम, वेदना और आक्रोश के विविध रंग समाहित हैं, जिन्हें मूवमेंट, कथक, भरतनाट्यम तथा कॉन्टेम्परेरी डांस के सुंदर संयोजन के माध्यम से प्रभावशाली रूप में प्रस्तुत किया गया है।
यह नाटक उन सभी शहीद सैनिकों को श्रद्धांजलि अर्पित करता है, जिन्होंने हमारे लिए अपना सर्वस्व न्यौछावर कर दिया।

मंच पर
| पात्र / भूमिका | कलाकार का नाम |
|---|---|
| रूपाली | शीना कौर |
| सोनू | ईशानी कनौजिया |
| शक्ति | सीमा पाल |
| सैनिक 1 | आशीष सिंह |
| सैनिक 2 | विनय गुज्जर |
| सैनिक 3 | सुश्रुत गुप्ता |
| सैनिक 4 | अभिषेक गुज्जर |
| सैनिक 5 | सैलेन्द्र |
| सैनिक 6 | सर्वजीत |
| सैनिक 1 की पत्नी / नृत्य | अंशिका पाठक |
| सैनिक 2 की पत्नी / नृत्य | प्रियम यादव |
| सैनिक 3 की पत्नी / नृत्य | अक्षिता मिश्रा |
| सैनिक 4 की पत्नी / नृत्य | दिलप्रीत कौर |
| सैनिक 5 की पत्नी / नृत्य | वंशिका शर्मा |
| सैनिक 6 की पत्नी / नृत्य | आद्या घोषाल |
पार्श्व मंच
| दायित्व / कार्य | नाम |
|---|---|
| प्रकाश परिकल्पना एवं संचालन | मोहम्मद हफीज़ |
| संगीत संयोजन | आद्या घोषाल |
| संगीत संचालन | अखिलेश |
| मंच व्यवस्था | अनुप कुमार सिंह |
| सहायक | सुश्रुत गुप्ता, आद्या घोषाल |
| वेशभूषा परिकल्पना | पुष्पलता |
| सहायक (वेशभूषा) | प्रियम यादव |
| प्रस्तुति नियंत्रण | कीर्ति प्रकाश |
| लेखन | डॉ. छवि मिश्रा |
| परिकल्पना एवं निर्देशन | पुनीत मित्तल |
| आभार | शशांक बहुगुणा |